https://youtube.com/@jharkhandflashnews?si=A-kEvUbmeGKcQsEi

जेटेट में ओल चिकि लिपि को नजरअंदाज करने पर नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी


चांडिल | 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)

चांडिल में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में आदिम डेवलपमेंट सोसायटी, झारखंड के सचिव बाबु राम सोरेन ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में संथाली भाषा की ओल चिकि लिपि को नजरअंदाज किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।उन्होंने कहा कि 9 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, जेटेट परीक्षा में संथाली भाषा के लिए ओल चिकि लिपि को मान्यता नहीं देते हुए देवनागरी लिपि में परीक्षा देने की बात कही गई है, जो पूरी तरह से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है।बाबु राम सोरेन ने बता6या कि संथाली भाषा की मूल और मान्य लिपि ओल चिकि है, जिसका आविष्कार वर्ष 1925 में गुरु गंके पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा किया गया था। यह लिपि भारत सरकार द्वारा यूनिकोड में शामिल है और हाल ही में भारत का संविधान भी ओल चिकि लिपि में प्रकाशित किया गया है, जिसका विमोचन स्वयं महामहिम राष्ट्रपति द्वारा किया गया।उन्होंने कहा कि लाखों लोग ओल चिकि लिपि के माध्यम से संथाली भाषा की पढ़ाई करते हैं, ऐसे में इसे नजरअंदाज करना लाखों छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।उन्होंने झारखंड सरकार और झारखंड एकेडमिक काउंसिल से मांग की कि नियमावली में संशोधन कर संथाली भाषा के प्रश्न ओल चिकि लिपि में ही छपवाए जाएं और जेटेट में इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।बाबु राम सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो संथाली शिक्षक और छात्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।इस मौके पर बिजय मुर्मू और भरत मुर्मू भी उपस्थित रहे।

Advertisement 


Post a Comment

Previous Post Next Post