चांडिल संवाददाता 23जून :राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति मंत्री के द्वारा हाल ही में दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी क्षेत्र को विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत दलमा को पर्यावरणीय पर्यटन (इको-टूरिज्म) के रूप में विकसित करने की बात कही जा रही है।हालांकि, इस योजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं युवाओं में चिंता की लहर दौड़ गई है। नीचे पढ़े
लोगों का कहना है कि "जब विकास की बात की जाती है, तो हमें पहले यह जानना जरूरी है कि यह विकास किसके लिए, किसके सहयोग से और किस दिशा में होगा।"स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या इस योजना में स्थानीय समुदाय की सहभागिता, सांस्कृतिक अस्तित्व और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी या नहीं? इन्हीं सवालों और आशंकाओं पर विचार-विमर्श के लिए 24 जून 2025 (मंगलवार) को बोटा गाँव (बोड़ाम प्रखंड) में प्रातः 10:00 बजे एक जन-विचार बैठक का आयोजन किया गया है।इस बैठक में दलमा क्षेत्र के सभी प्रभावित गाँवों के प्रतिनिधियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों की उपस्थिति होंगे।दलमा पाठ शिव थान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव सिंह लाया ने बताया कि "हमें यह सुनिश्चित करना है कि विकास के नाम पर हमारी ज़मीन, जंगल, जल और जनजीवन को नुकसान न पहुँचे। अगर योजना में स्थानीय हितों की अनदेखी की जाती है, तो हम सामूहिक रूप से अपनी बात सरकार तक पहुँचाएंगे।"बैठक में दलमा के पारिस्थितिकी तंत्र, वनाधिकार, पर्यटन के प्रभाव, विस्थापन की संभावनाएं तथा आजीविका पर संभावित असर जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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