चांडिल। जन अधिकार मंच की ओर से 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक आदिवासी संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण तथा विकसित भारत 2047 थीम पर आधारित कार्यक्रमों की श्रृंखला विभिन्न गांवों और शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित की जा रही है।कार्यक्रमों की शुरुआत 30 नवंबर 2025 को शाम 7 बजे कुकरू गांव में मसल जुलूस के साथ हुई। जुलूस के माध्यम से ग्रामीणों को 'आदिवासी यात्रा' में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। जुलूस में ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी रही और कार्यक्रम का मुख्य संदेश आदिवासी पहचान, एकजुटता और सामाजिक जागरूकता पर केंद्रित रहा।अगले दिन 1 दिसंबर को कुकरू गांव में ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल में जलवायु परिवर्तन, जंगलों में हो रहे बदलाव, आदिवासी नृत्य एवं वाद्य यंत्रों का महत्व, खानपान और परंपरागत रीति-रिवाजों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति और सांस्कृतिक नृत्य ने कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 2 दिसंबर को प्रोजेक्ट कन्या हाई स्कूल, पटमदा में ‘विकसित भारत 2047’ थीम पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने अपने चित्रों के माध्यम से भविष्य के भारत की विकास यात्रा और बदलते समाज की कल्पना प्रस्तुत की।इसके बाद 3 दिसंबर को बाटालुका में ‘ट्रेडीशनल कल्चर डे’ मनाया जाएगा। इसमें आदिवासी पहनावा, लोकगीत, वादन, परंपरागत कला और सामाजिक विरासत पर विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी। वहीं बुजुर्गों द्वारा नई पीढ़ी को पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी भी दी जाएगी।कार्यक्रम की श्रृंखला का अंतिम चरण 4 दिसंबर को पवनपुर गांव में आयोजित होगा, जहां बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में कला, पर्यावरण और सामाजिक विषयों के प्रति संवेदनशीलता और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है।जन अधिकार मंच के सदस्यों ने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और विकसित भारत 2047 के विज़न से जोड़ना है। मंच ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के जन-जागरूकता आधारित कार्यक्रम जारी रहेंगे।
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